सिर पर बाल उगाने के लिए हेयर ट्रांसप्लांट को काफी कारगर माना जाता है. लेकिन इसमें काफी जटिलताएं होती हैं. वैज्ञानिकों ने एक नई रिसर्च में पाया है कि जांघों से लिया गया फैट गंजी खोपड़ी पर बाल उगाने में ज्यादा असरदार हो सकता है.

आजकल के दौर में खराब लाइफस्टाइल और जेनेटिक कारणों की वजह से हेयरफॉल की समस्या तेजी से बढ़ रही है लेकिन यह केवल बालों के झड़ने तक सीमित नहीं है बल्कि आजकल कम उम्र में युवा खासकर पुरुष गंजेपन का शिकार हो रहे हैं. गंजेपन को दूर करने के लिए हेयर ट्रांसप्लांट किया जाता है. हेयर ट्रांसप्लांट में व्यक्ति के सिर के अन्य अन्य हिस्से से बाल लेकर सिर में उस जगह प्लांट किए जाते हैं जहां बाल उग नहीं रहे. यह एक लोकप्रिय तरीका है लेकिन इसके अपने कई रिस्क फैक्टर भी हैं.

वहीं, इस बीच ईरान में हुए एक नए शोध के दौरान गंजेपन को दूर करने के लिए एक नई तकनीक सामने आई है. इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि किसी के शरीर से निकाले गए वसायुक्त ऊतक के जरिए बालों को दोबारा उगाया जा सकता है.

यह असामान्य तकनीक विशेष रूप से स्कारिंग एलोपेसिया बीमारी में अच्छी तरह से काम करती है जो आमतौर पर स्थाई रूप से बालों के जाने का कारण है और इसे एक ऑटोइम्यून कंडीशन माना जाता है. 

क्यों कारगर है यह तकनीक

लेकिन यह पुरुषों में बालों के झड़ने के सबसे आम प्रकार मेल पैटर्न बाल्डनेस जैसी बड़ी समस्या के इलाज की भी उम्मीद जगाती है जो 50 वर्ष की आयु से पहले पुरुषों की लगभग आधी आबादी को प्रभावित करता है.

इस रिसर्च में इस प्रकार के गंजेपन की समस्या से पीड़ित चार पुरुषों और पांच महिलाओं को शामिल किया गया था. रिसर्च के दौरान उनकी जांघों से ली गई और 20 मिलीलीटर फैटी टिशू को तीन महीने के अंतराल पर तीन बार उनकी खोपड़ी में इंजेक्ट किया गया था. 

मौजूदों इलाज से ज्यादा कारगर

उपचार के छह महीने बाद इन लोगों के बालों की मोटाई में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई. 

यह देखने के लिए कि बाल कितनी आसानी से झड़ते हैं, उनके ‘हेयर-पुल टेस्ट’ किया गया, उसमें भी हेयरफॉल में कमी देखी गई.

ईरान के वैज्ञानिकों ने खोजी तकनीक
ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के नेतृत्व में इस शोध के लेखकों ने निष्कर्ष निकाला है कि यह उपचार खोपड़ी के भीतर हानिकारक सूजन को नियंत्रित कर सकता है जिससे बालों का घनत्व और मोटाई बढ़ सकती है. वसा के इंजेक्शन, जिसे वैज्ञानिक ‘एडिपोस टिशू’ कहते हैं, उनका कहना है कि यह बालों को फिर से उगा सकता है. 
 
जर्नल ऑफ कॉस्मेटिक डर्मेटोलॉजी में प्रकाशित इस रिसर्च में गंजेपन के मौजूदा उपचारों का वर्णन किया गया है जिसमें हेयर ट्रांसप्लांट से लेकर माइक्रोनीडल्स के उपयोग तक शामिल हैं. लेकिन इन उपचारों की कई समस्याएं हैं. इसलिए मरीज के आत्मविश्वास, आकर्षण और पर्सनैलिटी और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए चिकित्सीय विज्ञान में नए प्रयोग और दृष्टिकोण की हमेशा जरूरत होती है. 

वसायुक्त ऊतक ऐसे अणुओं का उत्पादन करते हैं जो विशेषज्ञों के अनुसार बालों को दोबारा उगाने में मदद कर सकते हैं. यह सूजन से लड़ सकते हैं और बालों के रोमछिद्रों को नुकसान से बचा सकते हैं.

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